Kitni Baatein (From "Lakshya")

Shankar Ehsaan Loy

कितनी बातें याद आती हैं
तस्वीरें सी बन जाती हैं
मैं कैसे इन्हें भूलूँ
दिल को क्या समझाऊँ
कितनी बातें कहने की हैं
होठों पर जो सहमी सी हैं
इक रोज़ इन्हें सुन लो
क्यों ऐसे गुमसूम हो
क्यों पूरी हो ना पाई दास्तान
कैसे आई है ऐसी दूरियाँ

दोनों के दिलों में छुपा है जो
एक अंजाना सा ग़म
क्या होपाएगा वो कम
कोई क्या कहे
दोनों ने कभी ज़िंदगी की
एक मोड़ पे थी जो पायी
है कैसी वो तनहायी
कोई क्या कहे
कितना वीरान है ये समा
साँसों में जैसे घुलता है धूंआ
कैसे आई है ऐसी दूरियाँ
कितनी बातें याद आती है
तस्वीरें सी बन जाती हैं
मैं कैसे इन्हें भूलूँ

तुमसे आज यूँ मिलके दिल को
याद आये लम्हें कल के
ये आँसू क्यों हैं छलके
अब क्या कहें
तुमने हमको देखा जो ऐसे
तो इक उम्मीद है जागी
फिर तुमसे प्यार पाने की
अब क्या कहें
आ गये हम कहाँ से कहाँ
देखे मुडके ये दिल का कारवाँ
कैसे आई है ऐसी दूरियाँ
कितनी बातें कहने की हैं
होठों पर जो सहमी सी हैं
इक रोज़ इन्हें सुन लो
क्यों ऐसे गुमसूम हो
कितनी बातें याद आती है
तस्वीरें सी बन जाती हैं
मैं कैसे इन्हें भूलूँ
दिल को क्या समझाऊँ



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